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जानिये अरंडी के बीज की बुवाई के बारे मे भारत सरकार के आंकडे क्या कहते है।

अरंडी के बीज की बुवाई  2016-17 मे 25 से 40 प्रतिसत गिरावट होने की संभवना है क्यूकी किसान मूंगफली और दलहन की बुवाई  ज्यादा कर रहे है।भारत के सोलवन्ट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के अनुसार पीछले तीन साल से अरंडी के तेल मे उच्च उत्पादन और मांग मे उतार-चढाव की वजह से अरंडी की किमतो मे कमी आई है।

भारतीय कृषि विभाग के अांकडो के अनुसार, 19 अगस्त तक अरंडी की बुवाई  425000 हेक्टर हुई है जो की पीछले साल ईसी समय तक 502000 हेक्टर हुई थी। जो 15 प्रतिसत के करीब गीरावट दीखा रही है।भारत मे कुल बुवाई 2015-16 मे करीब 11.3 लाख हेक्टर था।गुजरात जो भारत मे सबसे बडा अरंडी के बीज का उत्पादक राज्य है वहा 22 अगस्त 2016 तक 327200 हेक्टर मे अरंडी के बीज की बुवाई हुई है जो पीछले साल 500700 हेक्टर थी। जो अच्छी खासी गीरावट दीखा रही है।

भारत सरकार के आंकडो के अनुसार 22 अगस्त 2016 तक 23 प्रतिसत के करीब अरंडी के बीज की बुवाई मे कमी आई है। गुजरात मे 36 प्रतिसत के करीब बुवाई मे कमी आई हे और आंध्र-तेलंगाना मे 6 प्रतिसत के करीब कमी आई है। जबकी राजस्थान मे 16 प्रतिसत के करीब अरंडी के बीज की बुवाई मे वृध्धि हुई है।

“पीछले तीन सालो से अरंडी और अरंडी के तेल की किमते लगातार दबाव मे है। वही दूसरी और मुंगफली और दलहन बेहतर रिर्टन दे रहे है। ईस वजह से भारत मे अरंडी के बीज की बुवाई 25 से 40 प्रतिसत कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है।” एसा कहेना हे रोयल केस्टर, मुंबई के डिरेक्टर और केस्टर सीड और ओईल प्रमोसन काउन्सील के सहअध्यक्ष श्री हरेश व्यास का।

भारत दूनिया का सबसे बडा अरंडी के बीज का उत्पादक  और अरंडी के तेल का सबसे बडा निर्यातक है। “भारत से अरंडी के तेल का निर्यात लगभग स्थिर किया गया है ईस से अरंडी के तेल की किमतो पे दबाव पडा है।”व्यास ने कहा।

 

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