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भारत मे सस्ते ईन्टरनेट डेटा से कृषि के क्षेत्र मे हो सकती है नई क्रांती।

राजनैतिक लोग नरेन्द्र मोदी के डीजीटल ईन्डिया के केम्पेईन को दर्शाते हुए एक विज्ञापन के मदेनजर जब “आटा”(गेहु का आटा ) vs. डेटा का बहस करते है तब ये विज्ञापन भारत मे सस्ता ईन्टरनेट डेटा प्राप्त करने की संभवना जगा रहा है। लेकीन सस्ता और तेजी से डेटा की उपलब्धता का सहारा कृषि उतापादकता और किसानो की आय वृध्धि करने की क्षमता रखता है।

साइट उपयुक्तता की भविष्यवाणी नामक  भारत की अंतरिक्ष एजंसी ईसरो के द्रारा चल रहे एक कार्यक्रम के माध्यम से विशेष फसल, फसल ईन्टेन्सीटी, प्रारंभिक फसल मौसम पूर्वानिमान, मट्टी की बनावट,और नमी के साथ साथ कृषि जल प्रबंधन की भविष्यवाणी की जानकारी किसान अपने स्मार्ट फोन से ले पाएंगे तब ईन जानकारीयो का उपयोग करके वांछित परिणाम लिए जा सकते है।

“देश की अंतरिक्ष एजंसी आकलन कर रही की विशेष फसल विशेष विस्तार मे लगाई जा सकती है।लाकिन ईस तरह की जानकारी देश के प्रत्येक किसान तक पहोचाना ये एक बडी मुश्किल है। सरकार के डिजीटल भारत कार्यक्रम के माध्यम से ईस मे काफी मदद मिलेगी, किसान सस्ते ईन्टरनेट डेटा से अपने मोबाईल से ईन महत्वपूर्ण आदानो तक पहोच सकते है”, एसा अंतरीक्ष एजंसी के कार्यक्रम से जूडे एक अधिकारी का कहना है।

कई तरह की जानकारी देश भर में विभिन्न ‘कृषि विज्ञान केंद्र’ (Agriculture Science Centres) के माध्यम से साझा किया जा रहा है हालांकि, किसान को अभी भी खेती और फसल से जूडे सटीक समाधान तेजी से नही मिल रहे है।

सस्ते डेटा की उपलब्धता से ईस तरह की जानकारी जूटा ने मे उन्हे मदद मिलेगी, जीस तरह दुनिया डिजीटल खेती की दिशा मे आगे बढ रही है, डेटा से उपलब्ध जानकारी की वजह से किसानो को अपने खेत के बारे मे निर्णय लेने मे मदद मिलेगी। ये दिन दूर नही है जब किसान अपने खेत की संक्रमित फसल के हिस्से के फोटो वैज्ञानिको को भेज कर त्वरित समाधान अपने मोबाईल पर पा सकते है।

वैश्विक फसल संरक्षण और बीज की दिग्गज कंपनी बायर एजी के फसल विज्ञान विभाग ने पहले से ही भारत में अपने डिजिटल उपकरण का परीक्षण शुरू कर दिया है। डिजीटल खेती के पीछे किसानो के हर एक वर्ग मिटर क्षेत्र मे आये कीट, रोग और विड का समाधान बताकर किसानो के खेत की उत्पादकता बढाना और उनकी आई मे वृध्धि करने का विचार है।

कंपनी ने पिछले सप्ताह जर्मनी मे  “कृषि का भविष्य संवाद 2016” कार्यक्रम के दौरान अपने ‘डिजिटल खेती’ उपकरण का प्रदर्शन किया था।  भारत मे जहा ज्यादातर किसान छोटे जमीन के टुकडो मे खेती करते है उस पर ये उपकरण कैसे उपयागी होगे एसे एक प्रश्र्न के उतर मे बायर के कृषि विज्ञान विभाग के मुख्या श्री लेईम कोंडोन ने कहा, कंपनी ईन छोटे जमीनदारो की चुनौतियो से परिचित है और बहुत सारे परिक्षण किये जा रहे है, सही स्तर पर सही समाधान ढुंढ लीये जायेंगे।

कोंडोन ने उल्लेख किया की परिक्षण चल रहे हे की कैसे भारत मे मोबाईल तकनीक को कंपनी के कार्यक्रमो के साथ जोडा जाये और किसानो के शिक्षा के स्तर को ध्यान मे रखते हुए कैसे स्मार्ट और सरल तरीके से कंपनी समाधान बता पाये।

कृषि का भविष्य संवाद 2016 कार्यक्रम मे फसल वैज्ञानिको ने स्पष्ट किया की डिजिटलाईझशन से किसानो को सही समय पर खाद और फसल सुरक्षा के डोज को चुनने मे मदद मिलेगी।फसल सुरक्षा के उपाये के लीए आर्दश समय निर्धारित करने और प्ररंभिक समय मे ही कीट और रोग को पहचाने  मे सहायता होगी।

कंपनी ने कहा कि खेती हंमेशा से एक एसा क्षेत्र है जहा ज्ञान, अनुभव और आंतरिक अनुभुति के आधार पर ही निर्णय लीये जा सकते है। डिजिटलाईझशन, हालांकी, किसानों को और अधिक सही परिणाम की भविष्यवाणी करने के साथ ही सबसे अधिक प्राकृतिक चुनौतियो का सामना करने की क्षमता देता है।

ईस मे कहा गया, “किसानो की स्वाभाविक शक्ति ओर आधूनिक विज्ञान के संयाजन से, हम एक किसान को हर दिन, महिने, मौसम और वर्ष मे उचित निर्णय लेने मे मदद कर सकते है। निर्णय लेना कही भी, कसी भी समय सरल और तेज हो जायेगा”।

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