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महाराष्ट्र का किसानो से स्वदेशी कपास विकसित करने का आग्रह। ( Maharashtra urges farmers to grow indigenous variety of cotton )

 

“गुजरात मे कपास की खेती करने वाले किसानो को पीछले साल गुलाबी बोलवर्म की वजह से भारी नुकशान उठाना पडा है, हम सावधान कर रहे हे कि एसा हमारे साथ भी एसा हो शकता हे” ये कहना हे श्री पांडुरंग फुंदकर का।

 

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राज्य सरकार, राज्य के किसानो से आग्रह करना चाहती हे की स्वदेशी किस्म के कपास की खेती करे न की आनुवंशिक रूप से संशोधीत बी.टी. कपास की। पांडुरंग फुंदकर, कृषि मंत्रीने कहा राज्य यह सुनिश्चित करने के लीए अगले चार सालो के भीतर, महाराष्ट्रमे बुवाई कीये गये कपास मे कम से कम 25 प्रतिशत कपास  स्वदेशी  किस्म का हो ये हम सुनिश्चित करना चाहते है।

पांडुरंग फुंदकर ने कहा, पीछले वर्षो मे अन्य कीटको के हमले विशेषरूप से गुलाबी बोलवर्म मे वृध्धि हुई है और ईस वजह से कीटनाशको का ज्यादा उपयोग करना पड रहा है और किसानो का खर्च भी बढ रहा है।

“गुजरात में कपास किसानों को गुलाबी बोलवर्म के हमले की वजह से पिछले साल भारी नुकसान उठाना पड़ा है हम सावधान कर रहे हैं वही गाज हमारे किसानों पर भी गिर शकती है,” एसा उनका कहना है।

राज्य मे जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है कि किसान अपनी फसलो की सुरक्षा के लीए बी.टी. और नोन बी.टी. कपास का मिश्रण करे।

 

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